Tuesday, March 18, 2008

दिमाग रखें कूल-कूल

डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा की क्लास

किसी भी परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए जरूरी है कि परीक्षार्थी एग्जामिनेशन हाल में अपना दिमाग ठंडा रखते हुए प्रश्नों के जवाब दें। चूंकि आपने पूरे साल पढाई की है और कोर्स पर मजबूत पकड बनाई है, इसलिए प्रश्नपत्र देखकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सबसे पहले प्रश्नों को अच्छी तरह से समझें और फिर उत्तर दें। परीक्षा में हर विषय और हर स्टूडेंट की अपनी स्ट्रेटेजी होती है। उनका प्रदर्शन कैसे और बेहतर हो, इसके लिए विभिन्न विषयों पर हमारे एक्सपर्ट एग्जाम एडवाइज देते रहे हैं। इस बार का एडवाइज है-बीएससी (ऑनर्स) केमिस्ट्री पर

बीएससी (ऑनर्स) केमिस्ट्री के फ‌र्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा डरे रहते हैं, क्योंकि उनके दिमाग में बारहवीं कक्षा से ही यह बात बैठी रहती है कि केमिस्ट्री बहुत मुश्किल सब्जेक्ट है। लेकिन यदि पूरे साल आपने लगन से थ्योरी और प्रैक्टिकल्स किए हैं, तो इस स्टेज तक आप खुद को सहज महसूस कर रहे होंगे। बावजूद इसके यदि आपकी तैयारी में कुछ कसर बाकी है, तो उसे सिलेक्टिव स्टडी करके पूरा किया जा सकता है। चूंकि वार्षिक परीक्षाओं में अब बहुत कम समय बचा है, इसलिए अब ज्यादा से ज्यादा किताबें पढने में वक्त बर्बाद न करें। बेहतर यह होगा कि सबसे पहले आप अपने क्लास नोट्स का रिवीजन शुरू करें। रिवीजन के दौरान किसी टॉपिक पर कठिनाई आने पर कुछ सिलेक्टेड किताबों से मैटीरियल ले सकते हैं। इन दिनों आपके लिए जो किताबें उपयोगी हो सकती हैं, उनके नाम हैं :

कन्साइज इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री-ली

ऑर्गेनिक केमिस्ट्री-मॉरिसन ऐंड बॉयड

फिजिकल केमिस्ट्री-कैस्टलन

हौव्वा न समझें ऑर्गेनिक केमिस्ट्री को केमिस्ट्री के पेपर में स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा डर ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के पेपर से लगता है। पर इसको अच्छी तरह समझने के लिए इन बातों पर गौर करें :

ऑर्गेनिक कम्पाउंड को समझें।

नॉमेन क्लेचर पर विशेष ध्यान दें। नॉमन क्लेचर ऑर्गेनिक कम्पाउंड्स के नामों को निकालने की ही विधि है।

इस पेपर के लिए रोजाना करीब दो घंटे की प्रैक्टिस जरूरी है।

फिजिकल केमिस्ट्री से न घबराएं

ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के बाद फिजिकल केमिस्ट्री ही वह पेपर है, जिसका भूत परीक्षार्थियों को डराता है। यदि आप गणित के मूलभूत सिद्धांतों को समझते हुए न्यूमेरिकल्स को सॉल्व करने की प्रैक्टिस करें, तो आपके लिए यह पेपर बेहद स्कोरिंग बन जाएगा। इसकी तैयारी के लिए कुछ बातों पर ध्यान दें:

मैथ्स के सिद्धांतों, जिनका प्रयोग केमिस्ट्री के न्यूमेरिकल्स सॉल्व करने में होता है, उसको एक बार जरूर रिवाइज कर लें।

न्यूमेरिकल्स सॉल्व करते समय स्टेप्स का पूरा ध्यान रखें, क्योंकि स्टेप्स मिस करने पर भी नंबर काट लिए जाते हैं।

सेल्फ स्टडी करें

परीक्षाएं सिर पर होने की वजह से अब आपके पास तैयारी के लिए ज्यादा वक्त नहीं है, इसलिए टाइम बर्बाद न करें। आपकी डेट-शीट के मुताबिक जितने भी दिन एग्जाम के लिए बचे हैं, उन्हें हर पेपर की तैयारी के लिए बराबर बांटकर स्टडी करें। ग्रुप स्टडी की बजाय घर बैठकर तैयारी करें, तो ज्यादा अच्छा होगा। अपनी तैयारी के आकलन के लिए हर रोज पिछले कुछ सालों के प्रश्नपत्रों को हल करने का अभ्यास करें। इससे यह पता चल जाएगा कि आप किस तरह के सवालों को हल करने में ज्यादा समय लेते हैं और किसमें कम।

प्रैक्टिकल पेपर्स

केमिस्ट्री में थ्योरी पेपर्स के साथ-साथ प्रैक्टिकल परीक्षाओं की भी बराबर अहमियत है। आमतौर पर थ्योरी से पहले प्रैक्टिकल होते हैं, इसलिए इनसे संबंधित खास बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए :

जिस टॉपिक पर आपको प्रैक्टिकल करने के लिए दिया जाए, उसके ऑब्जर्वेशन साफ-साफ रिकॉर्ड करें।

प्रैक्टिकल के रिजल्ट को लिखते समय सावधानी बरतें। याद रखें कि ओवरराइटिंग से अंक कटते हैं।

श्च जो ग्राफ चार्ट आप बना रहे हैं, उसे दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार ही बनाएं। यदि निर्देश स्पष्ट न हों, तो ग्राफ का प्लॉट साइज बडा रखें, जिससे कि उसके महत्वपूर्ण हिस्सों को आसानी से दर्शा सकें।

प्रैक्टिकल के रिजल्ट को अंडर लाइन करें, जिससे परीक्षक आपके प्रयोग के परिणाम से आसानी से परिचित हो जाए।

प्रैक्टिकल पेपर्स में पूरे अंक मिलने की संभावना थ्योरी पेपर्स से कहीं ज्यादा होती है, इसलिए इन्हें सीरियसली लें।

लास्ट मिनट स्टडी से बचें

अक्सर परीक्षार्थी परीक्षा हॉल में जाते समय लास्ट मिनट तक पढते रहते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं होता। लास्ट मिनट स्टडी से किसी टॉपिक को लेकर कन्फ्यूज्ड भी हो सकते हैं, इसलिए साल भर की तैयारी पर भरोसा रखें और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कूल रहें।

एग्जामिनेशन हॉल में रखें सावधानी

एग्जामिनेशन हॉल में कूल रहकर आप प्रश्नों के जवाब बहुत अच्छी तरह से लिख सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित टिप्स को ध्यान में रखें :

पेपर मिलने के बाद फटाफट लिखना न शुरू कर दें।

पहले प्रश्नों को अच्छी तरह समझें, फिर आंसर शीट पर प्रश्न का सीरियल नंबर लिखकर आंसर लिखना शुरू करें।

आंसर का इंट्रोडक्शन ठीक से लिखें, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कहीं इंट्रो लिखने में ही ज्यादा टाइम न लगा दें।

आंसर शीट के जिस पेज पर एक आंसर पूरा हो, वहीं से दूसरा आंसर शुरू न करें। इसे अगले पृष्ठ से प्रारंभ करें।

अक्सर परीक्षार्थी यह सोचते हैं कि ज्यादा पेज भरने से अधिक अंक मिलते हैं। ऐसा नहीं होता। इसलिए पूछे गए सवाल के मुताबिक ही सारगर्भित उत्तर दें। फालतू बातें लिखकर एग्जामिनर को भटकाने की कोशिश न करें।

आंसर पूरा करने के बाद महत्वपूर्ण हिस्सों को अंडरलाइन जरूर करें।

सफलता के 5 टिप्स

अपने क्लास नोट्स और असाइनमेंट्स को तैयारी का मुख्य आधार बनाएं। जरूरत पडने पर कुछ इम्पॉर्टेट चैप्टर्स को सीधे किताबों से पढें।

इन दिनों 40 प्रतिशत टाइम पढने और 60 प्रतिशत समय सवालों के आंसर लिखने में लगाएं।

दूसरों की देखा-देखी न करें। जिस समय भी आप पढने में खुद को सहज महसूस करें, उसी समय पढना शुरू कर दें।

परीक्षा को लेकर थोडी एंग्जायटी स्वाभाविक है, इसे पॉजिटिव रूप में लें।

उन पेपर्स की तैयारी में टाइम ज्यादा दें, जिनमें आपको कठिनाई आती है।

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