कार्तिकेय वर्मा मिर्जापुर स्थित एक कालीन फैक्ट्री में मध्यम दर्जे के ओहदे पर कार्यरत हैं। उनके दो बेटियां और दो बेटे हैं। उनके सभी बच्चे प्रतिभाशाली हैं। उनका बडा बेटा नितिन इस वर्ष बारहवीं बोर्ड (पीसीबी) की परीक्षा में शामिल हुआ है। नितिन सीपीएमटी की परीक्षा में भी बैठ रहा है और उसे उम्मीद है कि मेरिट में ऊंचा स्थान हासिल कर उसे देश के किसी नामी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल जाएगा। पर कार्तिकेय वर्मा मेडिकल (एमबीबीएस) में प्रवेश और कुल साढे पांच साल की पढाई पर आने वाले करीब पांच लाख रुपये से अधिक के खर्चे को लेकर चिंतित हैं। जब उन्होंने अपनी इस चिंता से अपने सहकर्मी और दोस्त राजीव को अवगत कराया, तो उसने नितिन के अच्छे करियर के लिए एजुकेशन लोन लेने का रास्ता सुझाया। कार्तिकेय को भी यह बात जंच गई, लेकिन यह क्या! जब उन्होंने कुछ बैंकों से फोन पर बात की, तो उन्हें इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। दोस्त की सलाह पर वे शहर के एक बडे सरकारी बैंक के बडे अधिकारी से मिले और अपनी समस्या बताई। उस अधिकारी ने न केवल उनकी बात गौर से सुनी, बल्कि उनका उत्साहवर्द्धन करते हुए उनके बेटे का लोन पास कराने में हर संभव सहयोग करने का आश्वासन दिया। एक दूसरा केस जमशेदपुर के दिनेश ठाकुर ने अच्छे अंकों से ग्रेजुएशन कर कैट की परीक्षा दी है और आईआईएम से मैनेजमेंट करना चाहता है, पर उसके परिवार की स्थिति ऐसी नहीं है कि उसकी महंगी पढाई का भार वहन कर सके। ऐसे में दिनेश को एजुकेशन लोन का विकल्प दिखा, जिसकी मदद से वह मनचाही पढाई कर सकता था और उसके परिवार पर इसका बोझ भी नहीं पडता। लेकिन जब लोन के लिए उसे एक बैंक से दूसरे बैंक भटकना पडा, तो वह हताश होने लगा। अंतत: उसे भी एक सरकारी बैंक के सीनियर ऑफिसर से मिलने के बाद ही लोन अप्रूव कराने में कामयाबी मिली।
दरअसल, एजुकेशन लोन देने का दावा तो प्राय: सभी राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक करते हैं और उनके विज्ञापनों में ऐसा दिखता भी है, लेकिन वास्तविक स्थिति यही है कि बैंक एजुकेशन लोन लेने वालों के साथ पूरा सहयोग नहीं करते। इससे एजुकेशन लोन का मकसद ही निरर्थक लगने लगता है और इस मद का अधिकांश पैसा खर्च ही नहीं हो पाता। हालांकि, इसके लिए हाल ही में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बैंकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे एजुकेशन लोन को बढावा देने के लिए हर संभव कोशिश करें।
किसे चाहिए एजुकेशन लोन
मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, मेडिकल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे बेहतर करियर वाले कोर्स हर प्रतिभाशाली युवा करना चाहता है, लेकिन इन कोर्सो को करने में आने वाला पांच से दस लाख रुपये का खर्च उन्हें और उनके माता-पिता को हताश करता रहा है। भारत में साधारण विश्वविद्यालयी शिक्षा तो सस्ती है, जिसके लिए मिडिल और लोअर क्लास से संबंधित लोगों को कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन प्रोफेशनल शिक्षा इतनी महंगी है कि वे चाहकर भी साहस नहीं जुटा पाते। पर उनकी यह मुश्किल आसान बनाता है विभिन्न बैंकों द्वारा दिया जाने वाला एजुकेशन लोन। वैसे तो अधिकांश बैंक यह लोन उपलब्ध कराते हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस मामले में कहीं अधिक उदार है। इसका सबसे बडा कारण सरकार द्वारा एजुकेशन लोन को बढावा दिया जाना है। ऐसे लोन पर पेरेन्ट्स या गार्जियन को इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 80-ई के तहत कर छूट का लाभ भी मिलता है। लेकिन स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता एजुकेशन लोन लेने से पहले उसके सभी पक्षों, जैसे-रीपेमॅन्ट विकल्प, इंट्रेस्ट रेट, प्रॉसेसिंग फी, पेमॅन्ट फी आदि के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लें।
कितनी है सीमा?
एजुकेशन लोन के रूप में मिलने वाली धनराशि कोर्स या विषय की जरूरत के अनुसार तय की जाती है। वैसे, भारत में अधिकांश बैंक एजुकेशन लोन के रूप में अधिकतम पंद्रह लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराते हैं। भारत में पढने के लिए अधिकतम साढे सात लाख और विदेश में पढने के लिए अधिकतम 15 लाख रुपये मिल सकते हैं। हालांकि, कुछ बैंक बीस लाख रुपये और एचएसबीसी जैसे कुछ बैंक पच्चीस लाख रुपये तक एजुकेशन लोन के रूप में देते हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक चार लाख रुपये तक के लोन पर कोई ब्याज नहीं देना पडता, जबकि इससे ऊपर के लोन पर साधारण दर से ब्याज देना पडता है। सामान्यतया भारत में पढाई के लिए गए लोन पर पांच प्रतिशत और विदेश में पढाई के लिए गए लोन पर बारह से पंद्रह प्रतिशत का ब्याज लगता है।
क्या-क्या होता है शामिल?
आमतौर पर किसी भी बैंक द्वारा एजुकेशन लोन किसी कोर्स पर होने वाले खर्च के लिए दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित खर्च शामिल होते हैं :
संस्थान की फीस, हॉस्टल और भोजन पर होने वाला खर्च एग्जामिनेशन, लाइब्रेरी और लेबोरेटरी फीस पुस्तकों, वस्त्र और उपकरणों पर खर्च कॉशन मनी, बिल्डिंग फंड आवागमन का खर्च (खासकर विदेश में पढाई के लिए)
बैंक स्टूडेंट की आवश्यकता के अनुसार लैपटॉप, कम्प्यूटर या अन्य खर्चो के लिए भी धन दे सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक एजुकेशनल लोन के तहत टू-व्हीलर के लिए भी पैसा मुहैया कराता है। बैंक अमूमन संबंधित कोर्स पर होने वाले कुल खर्च का अस्सी से नब्बे फीसदी मुहैया कराते हैं।
कौन होता है योग्य? जिस किसी स्टूडेंट के लिए एजुकेशन लोन लेना हो, उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बहुत अच्छी होनी चाहिए। इसके अलावा देश या विदेश के किसी प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन लिया होना या इसकी स्वीकृति प्राप्त होना आवश्यक है। उसे भारतीय नागरिक होना चाहिए। टेक्निकल/प्रोफेशनल कोर्सो में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को बैंक प्राथमिकता देते हैं।
लोन के लिए जमानत
सभी बैंक प्राय: हर तरह के लोन के लिए जमानत यानी सिक्युरिटी लेते हैं। इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि आप यदि घर खरीदने के लिए होम लोन लेते हैं, तो बैंक जमानत के तौर पर घर स्वामित्व के दस्तावेज अपने पास रख लेता है और लोन की राशि चुकता होने के बाद ही उसे लौटाता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार चार लाख तक के एजुकेशनल लोन के लिए कोई सिक्युरिटी नहीं देती होती है, बस स्टूडेंट और उसके माता-पिता की आर्थिक पृष्ठभूमि और इनकम टैक्स रिकॉर्ड देखकर ही लोन दे दिया जाता है। लेकिन इससे अधिक धनराशि के लिए को-लैटरल सिक्युरिटी डिपॉजिट के माध्यम से एजुकेशन लोन दिया जाता है, जिसकी वास्तविक वैल्यू सामान्यतया लोन की धनराशि से दस-पंद्रह गुना अधिक होती है। इस डिपाजिट के तहत किसी प्रकार की अचल संपत्ति, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट या इसी तरह का कोई अन्य डिपाजिट हो सकता है।
लोन लौटाने की अवधि
एजुकेशन लोन लौटाने की अवधि पांच से लेकर सात वर्ष तक होती है। एक बार लोन री-पेमॅन्ट की शुरुआत हो जाने पर इसे सात साल के भीतर पूरा चुकाना होता है। वैसे, स्टूडेंट के कोर्स पूरा कर लेने या उसके नौकरी ज्वॉइन कर लेने के छह माह बाद (दोनों में से जो भी पहले हो), लोन की वापसी की शुरुआत करनी होती है। किसी कारण लोन चुकाने में असमर्थ रहने पर बैंक को सिक्युरिटी डिपाजिट जब्त करने या उसकी नीलामी करके अपनी धनराशि निकालने का हक होता है।
एजुकेशन लोन की कुछ खास बातें
ज्यादातर बैंक 15 लाख रुपये तक की एजुकेशन लोन देते हैं।
भारत में पढने के लिए साढे सात लाख और विदेश में पढने के लिए 15 लाख रुपये का लोन मिल सकता है।
एचएसबीसी जैसा बैंक 25 लाख रुपये तक का लोन देता है।
चार लाख रुपये तक का लोन बैंक केवल इनकम टैक्स पेपर तथा अन्य निवेशों की जांच करने के बाद दे देते हैं।
चार लाख रुपये तक के लोन पर कोई ब्याज नहीं देना पडता, जबकि इससे ज्यादा के लोन पर साधारण दर से ब्याज देना होता है।
लोन लेते समय रखें ध्यान
जरूरत भर का ही लोन लें, ताकि उसे चुकाने में दिक्कत न आए। इसलिए अपनी आवश्यकता का विश्लेषण पहले ही कर लें।
उसी कोर्स के लिए लोन लें, जिसे करने के बाद आसानी से नौकरी मिल जाए और लोन चुका सकें।
लोन लेने के लिए एक से अधिक बैंकों को परखें।
ब्याज की दरों और रीपेमॅन्ट विकल्पों के बारे में ध्यान से पढें। छिपी बातों का भी पता लगाएं, ताकि लोन चुकाते समय परेशानी न हो।
20 लाख तक ले सकते हैं लोन
देश या विदेश से उच्च शिक्षा हासिल करने में महंगी फीस अब बाधक नहीं है, क्योंकि इसके लिए प्राय: सभी बैंकों द्वारा एजुकेशनल लोन दिए जाते हैं। लेकिन एजुकेशन लोन प्राप्त करने के लिए कुछ शर्ते पूरी करनी होती हैं। एजुकेशन लोन कौन और कैसे ले सकता है, इस बारे में जोश की ओर से अमित निधि ने बात की आईसीआईसीआई बैंक के पर्सनल लोन हेड (मुंबई) राहुल मलिक से। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश :
एजुकेशन लोन कौन ले सकता है?
एजुकेशन लोन उन स्टूडेंट को ही दिया जाता है, जो आगे की पढाई यानी हायर टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्स भारत या इससे बाहर करना चाहते हैं। खासकर, एजुकेशन लोन विभिन्न करियर ओरिएंटेड कोर्सो-इंजीनियरिंग,मैनेजमेंट, मेडिकल आदि में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा, गे्रजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को भी एजुकेशन लोन दिया जाता है। वैसे, कोर्स फीस केअतिरिक्त कम्प्यूटर, मेडिकल किट आदि के लिए भी लोन दिया जाता है।
एजुकेशन लोन के लिए किन-किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
इसके लिए सबसे पहले जिस बैंक से लोन लेना है, वहां का निर्धारित फॉर्म भरना होता है। फॉर्म के अलावा, फोटोग्राफ, आईडेंटिटी प्रूफ, रेजिडेंस प्रूफ, इनकम प्रूफ, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन से संबंधित सर्टिफिकेट्स, सीनियर सेकेंड्री स्कूल की मार्कशीट, एमबीए के लिए पोस्ट ग्रेजुएट या गे्रजुएशन की मार्कशीट, स्कॉलरशिप से संबंधित डॉक्यूमेंट्स (यदि कैंडिडेट के पास है) आदि की जरूरत होती है। इसके अलावा, एडमिशन लेटर और कोर्स ड्यूरेशन आदि से संबंधित प्रूफ की भी जरूरत होती है।
एजुकेशन लोन आसानी से स्वीकृत कराने के लिए किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए?
स्टूडेंट को चाहिए कि वे लोन से संबंधित जो विवरण और दस्तावेज दे रहे हैं, वे पूरी तरह सही हों और बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों। साथ ही, कोर्स के दौरान कितना खर्च आ सकता है, उसका भी विवरण देना चाहिए।
क्या लोन की स्वीकृति यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट के स्टेटस पर भी निर्भर करती है?
लोन की स्वीकृति बैंक के नियमों के तहत ही दी जा रही है। कई बार लोन के दौरान कोर्स और यूनिवर्सिटी को भी ध्यान में रखा जाता है। साथ ही, पेरेंट्स या को-अप्लिकेंट केफाइनैंशियल स्टेटस को भी देखा जाता है। यदि आईसीआईसीआई बैंक की बात करें, तो हम इंस्टीट्यूट या कॉलेज के अलावा, कैंडिडेट्स के पेरेंट्स या को-अप्लिकेंट के फाइनैंशियल स्टेटस को भी मद्देनजर रखते हैं।
एजुकेशन लोन के अंतर्गत अधिकतम और न्यूनतम लोन की सीमा कितनी है?
अलग-अलग बैंकों के अनुसार एजुकेशन लोन न्यूनतम 20 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 20 लाख रुपये तक लिया जा सकता है।
क्या एजुकेशन लोन के लिए सिक्योरिटी की भी जरूरत होती है?
चार लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर किसी सिक्योरिटी की जरूरत नहीं होती है। लेकिन इसके लिए हम पेरेंट्स के फाइनैंशियल स्टेटस का अप्रेजल करते हैं। यदि चार लाख रुपये से अधिक लोन लेते हैं, तो लोन के अनुरूप सिक्योरिटी की जरूरत होती है या किसी थर्ड पार्टी को गारंटी लेनी पडती है।
एजुकेशन लोन के री-पेमॅन्ट की प्रक्रिया क्या है?
कोर्स के दौरान पहले साल उपयोग किए गए लोन का सिम्पल इंटरेस्ट ही अदा करना होता है। लेकिन कोर्स खत्म होने के बाद री-पेमॅन्ट की प्रक्रिया शुरू होने के पांच वर्षो में पूरा पेमॅन्ट करना होता है। आमतौर पर कोर्स पूरा होने या नौकरी मिलने के छह माह बाद से लोन की रकम लौटानी होती है।
RAJVIR YADAV
Tuesday, March 18, 2008
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